bhakti sagar
Navratna Watch
Navratna Watch
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| रत्न: | माणिक्य, मोती, मूंगा, नीलम, पुखराज, पन्ना, ओपल, लहसुनिया और गोमेद रत्न है। |
|---|---|
| मंत्र: | गायत्री मंत्र (Backside) |
| यंत्र: | श्री यंत्र (Middel) |
| चक्र: | राशि चक्र - 12 प्रतिनिधित्व |
| माप: | फ्री साइज (Adjustable) |
नवरत्न घड़ी (Navratna Watch):
नवरत्न घड़ी अधिक से अधिक प्रसिद्ध हो रही है नवरत्न की घड़ी धारण करने से जातक को सुख-सम्पदा, यश, मान, प्रतिष्ठा, घन, सौभाग्य, पारिवारिक सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसके कारण अनिष्ट दूर होते हैं। रोग-शोक नहीं सताता है और आयु वृद्धि होती है। नवरत्न घड़ी की विशेषता यह होती है कि इसे किसी भी राशि वाला जातक धारण कर सकता है।
नवरत्न घड़ी (Navratna Watch) को कौन धारण कर सकता है:
नवरत्न घड़ी किसी के भी द्वारा पहनी जा सकती है और इसमें कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं है। यह सभी के अनुरूप है, चाहे उनके राशि चिन्ह पर ध्यान दिए बिना, और एक ज्योतिषी की सिफारिश के बिना पहना जा सकता है। नवग्रहों की एक साथ शांति करने का एकमात्र उपाय है नवरत्न घड़ी . नवग्रहों के नवरत्नों से बनी ये घड़ी आपको सभी ग्रहों के अशुभ प्रभाव से बचाकर आपके जीवन को सुख और समृद्धि से भर देगी। जिससे सारे ग्रहो की कृपा आप पर बनी रहेगी।
नवरत्न घड़ी को धारण करने से आपको एकसाथ ही नौ ग्रहों का शुभ फल मिल जाता है। और आपको अलग अलग कोई रत्न धारण करने की जरूरत नहीं होती।।
नवरत्न घड़ी (Navratna Watch) के लाभ :
*घर में सुख-शांति का आगमन होता है।
*इसका प्रयोग करने से धन की प्राप्ति होती है और धन आगमन के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
*जिस जातक की कुंडली में कोई भी ग्रह अशुभ या निचे स्थान में हो और किसी प्रकार का कोई लाभ ना हो रहा हो तो नवरत्न घड़ी धारण करना चाहिए।
*यह एक साथ सभी नौ ग्रहों रत्न के लाभ देती है
नवरत्न घड़ी (Navratna Watch) को धारण करने की विधि:
यदि कुंडली में अधिक ग्रह कमजोर हों तो नवरत्न घड़ी को दाएं हाथ में रविवार की सुबह धारण करें, नवरत्न शुभ माना जाता है और माना जाता है कि जो कोई भी इसे पहनता है वह अच्छा स्वास्थ लाएगा। यह स्वास्थ्य, समृद्धि, खुशी और मन की शांति का प्रतीक है। इसके अलावा, यह नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों के प्रभाव को छोड़ देती है, जबकि रत्नों के सकारात्मक प्रभाव को मजबूत करती है ।
जन्म कुंडली के अनुसार अगर किसी कुंडली में विभिन्न शुभ ग्रह हों और ग्रहों की स्थिति ऐसी हो कि रतन विशेष का चयन मुश्किल हो या रत्न चयन नहीं किया जा सकता हो तो एसी दशा में नवरत्न की घड़ी धारण करना श्रेयस्कर होता है।.
